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अब अगर पत्र लिखो तो  . . .  

सुनो, अब अगर पत्र लिखो, तो मेरे नाम ना लिखना।  अगर मेरे नाम लिखो तो, प्रेम की शुरुआत लिखना, नये जीवन का प्रभात लिखना  सात जन्मों का साथ लिखना, बीते कल से अज्ञात लिखना  अपनी समस्याएँ लिखना, और फिर क्षमाएँ लिखना  प्रेम में अपनी विफलताएँ लिखना, फिर मेरी सफलताएँ लिखना  प्रेम शुद्ध लिखना, मुझे मंत्रमुग्ध […]

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” ना उम्र की सीमा हो, ना जन्म का हो बंधन।”

सालों बाद जब अपने बचपन वाले घर लौटी,उस शहर की चकाचौंध से दूर । देखा तो पाया, कुछ नहीं बदला है वहां। बस कुछ बदला है तो वो है वक़्त। वो जो मैंने दीवार पर बनाकर छोटा सा खिलौना टांगा था, उसे आज भी वहीं पाया। पलंग के सिरहाने एक छोटे से कोने में अपना

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