अब अगर पत्र लिखो तो  . . .  

सुनो, अब अगर पत्र लिखो, तो मेरे नाम ना लिखना। 

अगर मेरे नाम लिखो तो,

प्रेम की शुरुआत लिखना, नये जीवन का प्रभात लिखना 

सात जन्मों का साथ लिखना, बीते कल से अज्ञात लिखना 

अपनी समस्याएँ लिखना, और फिर क्षमाएँ लिखना 

प्रेम में अपनी विफलताएँ लिखना, फिर मेरी सफलताएँ लिखना 

प्रेम शुद्ध लिखना, मुझे मंत्रमुग्ध लिखना 

मुझे भायें वो पुष्प लिखना, सारे भय से मुक्त लिखना

सत्य लिखना, न असत्य लिखना, मुझे तुम नित्य लिखना 

होकर कृतज्ञ लिखना, सात फेरों की प्रतिज्ञा लिखना 

कुछ ज्ञान लिखना, विज्ञान लिखना 

कालिदास की शाकुन्तलम् – अभिज्ञान लिखना 

नारी को माता सीता लिखना, श्रीमद्भगवद्गीता लिखना  

तुम्हारा महत्व मेरे लिए मंदाकिनी लिखना, “प्रसाद” की कामायनी लिखना 

साथ बैठने की संध्या लिखना, स्थान घाट गंगा लिखना 

ज्ञान को मधुसूदन लिखना, प्रेम भूमि को वृंदावन लिखना 

धरा और अम्बर का आलिंगन लिखना, प्रयागराज का संगम लिखना

जहाँ साथ थे वो  कण- कण लिखना, मन्त्रमुग्ध वो प्रत्येक क्षण लिखना 

स्वयं को मेरे समकक्ष लिखना, विचार अपने प्रत्यक्ष लिखना 

मेरे पक्ष में सब निष्पक्ष लिखना, साथ में जीवन का लक्ष्य लिखना 

मुझे लिखना, चाहें परोक्ष लिखना, संतोष से मिला मोक्ष लिखना 

प्रेम की भाषा का शब्दकोश लिखना, अपने गुण और मेरे दोष लिखना 

पितृसत्ता की छाप लिखना, और उसमे मिले संताप लिखना 

हमारे विषय के अलाप लिखना, तुम्हारे बंद कक्ष में किए विलाप लिखना 

स्त्री सम्मान में झुका शीश लिखना, माताओं से मिले आशीष लिखना 

बांसुरी का साज़ लिखना, समाज के रीति रिवाज लिखना 

हमारी ना जाति लिखना, केवल सनातनी लिखना 

हमारे लिए न्याय लिखना, स्वयं को मेरा पर्याय लिखना 

हम दोनों को निर्दोष लिखना, परोपकार का संतोष लिखना 

प्रेम की पराकाष्ठा लिखना, विवाह की चेष्टा लिखना 

मेरा शौर्य लिखना, फिर उसे अपना सिरमौर लिखना 

मेरे सारे शोध लिखना, मेरे अपमान के विरोध लिखना 

मेरे जीवन में अपने चमत्कार लिखना, मुझे मिले पुरुष्कार लिखना 

मेरा मान लिखना, सम्मान लिखना 

अपनी गलती का भान लिखना, अपने प्रेम का प्रमाण लिखना 

मुझे तुम विश्वसुन्दरी ना लिखना, एक आत्मनिर्भर नारी लिखना 

मुझे चाहने की मनसा लिखना, चाहो तो मेरी प्रसंसा लिखना 

काँपते मेरे अधर लिखना, शब्द तुम्हारे प्रखर लिखना 

अपनी भूल लिखना, मुझे चुभे शूल लिखना 

अपने हृदय की चोट लिखना, मैं बनी तुम्हारी ओट लिखना

मेरे उपकारों का आभार लिखना, अपने अच्छे व्यवहार लिखना  

हमारी कहानी में तुम मुझको धरा लिखना, सत्य तुम खरा लिखना 

पत्र अत्यंत सहज लिखना, बहुत सोच समझ लिखना 

क्षमा की अरज लिखना, बिना किसी गरज लिखना 

अपना प्रणय लिखना, अच्छा समय लिखना 

अपनी भूलों का क्रम लिखना, तुम्हारा प्रेम मेरा भ्रम लिखना 

मेरी सारी शंकाओं के कारण लिखना, तत्पश्चात् उनके निवारण लिखना 

ठंड की कच्ची धूप लिखना, स्वयं को अपनी कथाओं का भूप लिखना 

सुख का अर्थ लिखना, ना प्रेम को व्यर्थ लिखना 

सादा जीवन उच्च विचार लिखना, ना समाज के व्यभिचार लिखना

उज्जवल भविष्य की शपथ लिखना, पुरुष का मनोरथ लिखना 

हमारे संघर्षों का परिपथ लिखना, साथ करेंगे वो तीरथ लिखना 

बिन मेरे जीवन में आये परिवर्तन लिखना, अधिक अपना नवजीवन लिखना 

नवजीवन के सौंदर्य सिद्धांत लिखना, हृदय में मेरे लिए एकांत लिखना 

पत्र में तुम “प्रिय ज्योति” लिखना, समय की गति, भाग्य और नियति लिखना | 

बस, अब अगर पत्र लिखो तो…

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